दिव्या गुप्ता जैन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दिव्या गुप्ता जैन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 21 जून 2010

अपने पिता के योगदान को विस्मृत न करें

अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस पर विशेष
------------------------------------
अपने पिता को विस्मृत न करें
दिव्या गुप्ता जैन
-------------------------



माता-पिता का किसी भी व्यक्ति के जीवन में क्या महत्व है ये बताने की आवश्यकता नहीं है।जहाँ माँ कोख में बच्चे को अपने खून से सींचती है तो वही पिता उसे परिपक्व होने तक अपने पसीने से पालता है। एक तरफ माँ बच्चे के पालन- पोषण ढेर सारा त्याग और तपस्या के साथ करती है, तो दूसरी तरफ पिता एक मजबूत आधार की तरह हर समय सहारा देता है। इसीलिए यदि किसी परिवार में दुर्घटनावश यदि पिता की असमय म्रत्यु हो जाती है तो परिवार बिखर जाता है और बच्चे शिक्षा, सहारा, सलाह, प्रोत्साहन के आभाव में आगे नहीं बढ़ पाते।


हर पिता अपने बच्चो को अपने से ज्यादा सफल देखना चाहता है जिसके वह कठिन परिश्रम करता है।अपने शौकों पर नियंत्रण करता है। जरुरत पड़ने पर कर्ज भी लेता है। खुद छोटे से घर में रहके, साइकिल चलाके अपने बच्चो के लिए बड़े घर और गाड़ी का सपना देखता है। और उस सपने को पूरा करने के लिए अपनी पूरी जिंदगी को संघर्ष में निकल देता है। पिता वो शाख है जो अपने बच्चे की हर मुश्किल में उसका साया बन जाता है। जिस समय उसे एक कदम भी चलना भी नहीं आता उसे उँगली पकड़ के चलना सिखाता है परन्तु आजकल के बच्चे अपना फर्ज भूल गए है

इसीलिए शहर के नक़्शे में वृद्धाश्रम दिखने लगे है। जहाँ पिता अकेले पाँच बच्चो को पाल लेता है उन्हें जीवन के सारे सुख आराम देता है वही पाँच बच्चे मिलकर एक पिता को नहीं पाल पाते। कमाने की भागदौड़ में हम
मॉल में लगी सेल देखने का, किटी पार्टी का, समारोह में जाने का समय तो निकल लेते हैं! लेकिन बूढ़े पिता के जोड़ों के दर्द का हाल पूछने का समय नहीं निकल पाते। यहाँ तक कि हमें उनकी दवा का खर्च भी अखरने लगता है। हम उस समय ये भूल जाते है की ये वही बरगद का पेड़ है जिसकी छाया में पलके हम बड़े हुए है। यदि उन्होंने भी उस समय अपनी ऐशोआराम में समय बिताया होता तो शायद हम इस ऊंचाई पर नहीं पहुच पाते।

आइये अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस पर अपने पिता को सम्मान दे। हमारे जीवन में उनके योगदान को याद करें। और यदि वो अभाग्यवश हमारें साथ नहीं है तो अपने बच्चो के साथ उनके योगदान की चर्चा करें।

रविवार, 9 मई 2010

तुझे सब है पता मेरी माँ

तुझे सब है पता मेरी माँ --- दिव्या गुप्ता जैन ===========================


माँ ये बात हमेशा मेरे लिए आश्चर्य का विषय रही है की तुम्हे सब कैसे पता चल जाता है! तुम कैसे मेरा चेहरा पढ़ लेती हो! मेरी घबराहट को पहचान लेती हो!

मैं जब तुम्हारी कोख मैं पल रही थी, तभी तुमने मेरे लिए नन्हे- नन्हे लेस लगे कपडे बना लिए! तुम्हे कैसे पता चला की मैं उनमे इतनी सुन्दर दिखूगी! तुमने मिर्ची खाना बंद कर दिया की मुझे जलन होगी! नापसंद होते हुए भी तुमने हरे पत्ते वाली सब्जी खाना शुरू कर दिया की जिससे मुझे पोषण मिले! मुझे इस दुनिया मैं लाने के लिए कितना असहनीय दर्द सह लिया!

जब तुम्हारी कोख से बाहर आने के बाद मुझे उजाला अच्छा नहीं लगता था, मैं दिन मैं सोती थी और तुमने मेरे लिए अनगिनत रातें जाग कर गुजारी! मुझे सूखी जगह पर सुला कर खुद मेरी गीली जगह पर सो जाती थी!

तुम्हे कैसे मेरा चेहरा देख कर पता चल जाता था की मुझे भूख लगी है, और तुम झट से मुझे अपना दूध पिला देती थी! मुझे चोट न लगे इसलिए मेरे घुटने चलने पर तुम हमेशा मेरे आस-पास रहती थी! मुझे हमेशा काला टीका लगाती कि मुझे किसी की नज़र न लगे! मुझे थोडा सा भी बुखार होता तो रात भर मेरे लिए जागती थी!

मुझे खाना अच्छा नहीं लगता था तो तुम गुडिया से बहला के खिला देती थी! जब मैं रोते-रोते पहली बार स्कूल गयी तो तुम सारा दिन मेरे साथ स्कूल मैं रही ताकि मैं सभी बच्चो के साथ घुलमिल जाऊं! जब एक बच्चे ने मुझे मारा था तो तुमने जाके उसके घरवालों से मेरे लिए झगडा किया!

माँ जब भी मुझे डर लगता था तो मैं तुम्हारे आँचल के पीछे चुप जाती थी, तब तुम्ही गोद मैं बैठाके मेरा डर भगाती थी! जब मेरे गणित मैं कम नंबर आने पर पापा ने मुझे डाटा था तो तुमने मेरा पक्ष लेकर उन्हें समझाया था! मुझे दिन-रात पढने मैं मदद की और मेरे बहुत अच्छे नंबर आये! माँ तुमने तो जादू कर दिया!

मुझे अब भी याद है माँ जब मेरी एक लड़के से दोस्ती को लेकर लोगो ने अफवाह उडाई थी तो सिर्फ तुमने ही मुझ पर विश्वास किया था! पापा को मेरी जल्दी शादी करने से रोकने के लिए तुमना कितना झगडा किया था!

तुम मेरी ढाल हो माँ! तुमना किसी की परवाह ना करते हुए मुझे पढने का और काम करने का मौका दिया! तुम मेरे लिए ईश्वर का वरदान हो माँ! तुम्हारे बिना तो मैं हो ही नहीं सकती थी!

===========================
दिव्या गुप्ता जैन द्वारा प्रेषित